Gazal by Karan “Sahar”

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जल भी जाएगा, जला भी देगा,
वो तो आशिक है रुला भी देगा ।।

पूरी शिद्दत से वफ़ा कर तो सही,
फिर जो माँगेगा ख़ुदा भी देगा ।।

आज कल ऐसा उसूल कहाँ है,
जो ज़ख़्म देगा वो दवा भी देगा ।।

वो खतरनाक है, बच के रहना,
इंसान है बेबात की सज़ा भी देगा ।।

चाँद मेरा कोई दोस्त थोड़ी है,
जो रात भी देगा और सुला भी देगा ।।

इतनी मुहब्बत काफी नहीं है क्या,
अब क्या मुझ को दग़ा भी देगा ?

सफ़र ने इतनी रिश्वत तो ले ही ली,
कि नक्शे के साथ अब पता भी देगा ।।

वो एक शख्स मेरा तमाशा देख कर,
पैसा तो देगा ही और दुआ भी देगा ।।

“सहर” के लिक्खे से तू दोस्ती कर ले,
ये आँसू भी देगा और मज़ा भी देगा ।।


About the Author:

 Karan Sahar (Kavitactic)

मेरा नाम करन “सहर” है, सहर मेरा तख़ल्लुस है,
मैं नज़्में और ग़ज़लें लिखता हूँ ।। मैं रामगढ़ (मोहाली) में रहता हूँ और मनीमाजरा में Computer Lab Attendent की job करता हूँ ।।

मैं अगर ज़ोर से गिरता, तो बिखर जाता शायद,
इसलिए धीरे से मैं सिसकियों में बदल रहा हूँ ।।


This post was made in collaboration with Kavitactic. Kavitactic strives to build a community of poets Chandigarh can call its own. They organise monthly events where they share, discuss and read a lot of poetry!

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